जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर ‘सत्य समाचार’ लाया है हमारे कान्हा से जुड़ी कुछ रोचक कहानियाँ।
गोकुल की गलियों में जब-जब नंदलाल की खिलखिलाहट गूँजती थी, तब सब समझ जाते कि कोई न कोई शरारत ज़रूर हुई है। उनमें सबसे प्रसिद्ध थी—माखन चोरी।
गोपियों के घर जैसे ही ताज़ा माखन जमता, वैसे ही कन्हैया अपने सखाओं के साथ वहाँ पहुँच जाते। कोई बाँसुरी बजाता, कोई ध्यान भटकाता और कोई कन्हैया को कंधे पर चढ़ाकर मटके तक पहुँचा देता। फिर सब मिलकर माखन निकालते और बाँटकर खाते। उनकी यह मस्ती गोकुल में हर किसी को हँसा देती थी।
लेकिन धीरे-धीरे गोपियाँ तंग आ गईं। वे शिकायत लेकर माँ यशोदा के पास पहुँचीं—
“मइया! तुम्हारा लाल तो सबका माखन चुरा लेता है। हम जितनी मेहनत से माखन बनाते हैं, उतनी जल्दी वह उसे बच्चों संग बाँट देता है।”
यशोदा गुस्से में बोलीं—
“आज तो मैं इस नटखट को बाँधकर रखूँगी!”
उन्होंने कन्हैया को पकड़ लिया। पर जैसे ही देखा कि उनके छोटे-छोटे हाथों से माखन गिरकर बच्चों में बाँट रहा है, उनका दिल पिघल गया। तभी कान्हा मुस्कुराए और बोले—
“मइया, चोरी कहाँ? मैं तो सबको जोड़ता हूँ। माखन सबका है, और उसका स्वाद भी तभी है जब सब मिलकर खाएँ।”
यशोदा समझ गईं कि उनका लाल कोई साधारण बच्चा नहीं, बल्कि प्रेम का प्रतीक है। उनकी हर शरारत के पीछे एक गहरी सीख छुपी है—सुख और स्वाद तभी बढ़ता है, जब उसे सबके साथ बाँटा जाए।
