Published By — Ayush Asthana

जमशेदपुर: गोविंदपुर थाना अंतर्गत घोड़ाबांधा में विगत 2 दिन पहले रोड के किनारे खड़ी ओला की गाड़ियों में आग लग गई थी जिसमें से 4 गाड़ी पूरी तरह आग के चपेट में आने से पूरी तरह जल गई और वहीं जब हमारे चैनल के माध्यम से लोगों को जानकारी मिली तो जितने भी ग्राहक ने ओला गाड़ियों ख़रीद थी वो लोग घोड़ाबांधा आते हैं जिससे से कुछ लोगों की गाड़ी जल चुकी थी और वहीं कुछ लोगों की गाड़ी जैसे ग्राहक छोड़ के गए थे वैसे ही पड़ी थीं।लेकिन हद तो तब पार हो गई जब कई ग्राहक जिनमें से कोई 6 महीने से, कोई 1 साल से गाड़ी बनाने के लिए देकर गए थे लेकिन आज तक नहीं बन पाई और बनने के बजाय ग्राहकों के गाड़ी से कई पार्ट निकाल भी दिए गए हैं जिससे ग्राहक काफी आक्रोशित हो उठे थे और उनका कहना था कि, जब हम ओला कंपनी की गाड़ी ले रहे थे तो हमसे कहा गया कोई दिक्कत नहीं होगी लेकिन जब गाड़ी में दिक्कतें शुरू हुई तो हमने ओला सेंटर पर कई दफा फोन भी किया लेकिन जानबूझ कर किसी ने फोन नहीं उठाया।धैर्य की सीमा सबसे ज्यादा तब पार हो गई जब एक लड़के ने कहा कि, मै अपनी गाड़ी को लगभग 6 महीनों से बनने के लिए देकर गया हूं लेकिन अभी तक नहीं बना उस लड़के ने ये भी कहा कि, मैं स्टुडेंट ही अपना पढ़ाई छोड़कर मैं बार-बार नहीं आ सकता और सोचा था की ओला गाड़ी खरीद लेने से पैसा का खर्च कम हो जाएगा ताकि मैं बड़े आराम से कालेज आ जा सकूं लेकिन यहां तो मेरी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।वही एक महिला अपने 5 साल की बेटी के साथ कई महीनों से चक्कर लगा रही है और आज एक गाड़ी में ओला गाड़ी को लेकर सेंटर पर पहुंची लेकिन काम नहीं हो पाया।ऐसे में ओला सेंटर अपनी जवाबदेही पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे और जब पत्रकारों ने उनसे कहा की आप सच्चाई को छुपा नहीं सकते और आप किसके परमिशन से वन विभाग और रोड़ के किनारे आपने गाड़ियां खड़ी की थी तो ओला सेंटर वालो ने कोई जवाब नहीं दिया और कहा की जो करना होगा कर लीजिएगा।ऐसे में सवाल वन विभाग और प्रशासन पर उठना लाजिमी है कि, इतनी बड़ी संख्या में लोगों के साथ धोखा किया जा रहा है लेकिन सभी मौन है साथ ही जिस मकान में ओला सेंटर है उसके मकान मालिक पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि, आपने इस बात का विरोध क्यों नही किया जब ओला वाले रोड के किनारे और कटीले तारों को तोड़ कर गाड़ियां खड़ी की जा रही थी। साथ ही इतनी सैकड़ों की संख्या में वन विभाग के जमीन पर गाड़ियां खड़ी थी फिर भी वन विभाग चुप्पी साधे बैठा हुआ है। लेकिन इन लोगों से क्या मतलब परेशानियों का सामना तो आम जन मानस को करना पड़ रहा है जो इन ओला वालों की वजह से दर दर की ठोकरें खाने पड़ रहें हैं।
