
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे निर्भीक, तेजस्वी और क्रांतिकारी नेताओं में से एक थे। उनका जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा (अब ओडिशा) के कटक नगर में हुआ था। उनके पिता जानकीनाथ बोस एक प्रतिष्ठित वकील थे। सुभाष चन्द्र बोस बचपन से ही तेज बुद्धि, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत थे।उन्होंने इंग्लैंड जाकर भारतीय सिविल सेवा (ICS) की परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन देश की गुलामी स्वीकार न करते हुए उन्होंने इस प्रतिष्ठित पद से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद वे पूरी तरह से स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। महात्मा गांधी और कांग्रेस से मतभेद होने के कारण उन्होंने अलग राह चुनी और आजाद हिंद फौज की स्थापना की।नेताजी ने “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” जैसा ओजस्वी नारा देकर देशवासियों में नया जोश भर दिया। उनका उद्देश्य सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से भारत को स्वतंत्र कराना था। 18 अगस्त 1945 को उनके निधन को लेकर आज भी रहस्य बना हुआ है।नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जीवन त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है, जो आज भी युवाओं को देश के लिए समर्पित होने की प्रेरणा देता है। ऐसे वीर पराक्रमी और साहसी योद्धा का जन्म भारतभूमि पर होना उन वीर सपूतों की प्रेरणादायक गाथ के इतिहास की स्वर्णिम अक्षरों में नाम दर्ज करना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
